महाभारत से सीख -
जब भीम और हिडम्बा का विवाह हो रहा था , तब भीम के भाई नकुल ने युधिस्ठर से पूछा -क्या मनुष्य और राक्षस का विवाह धर्म है ? क्योंकि राक्षस तो अधर्मी, कुकर्मी, व्यावचारी होते है परंतु युधिस्ठर ने कहा की माता(कुंती) का आदेश धर्म है और माता कुंती के आदेश अनुसार यह आवश्यक नही की राक्षस कुल में जन्म लेने वाला हर व्यक्ति अधर्मी हो व मानवता के विरुद्ध हो ।
माता कुंती का जवाब कुछ ऐसा था -
"में अपने पुत्र के सच्चे प्रेम को जाति, धर्म,में नही बांध सकती "
अतः अंत मे वहाँ से जाते वक्त माता कुंती ने हिडम्बा को कहा कि तुम आदर्श नारी और सरल ,सच्चे हृदय से धर्म का पालन करने वाली महिला है और में तुम्हे आशीर्वाद देती हूं कि आने वाले समय में मनुष्य तुम्हारी पूजा करेंगे ,जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण हिमाचल के मनाली में स्तिथ हिडिम्बा मंदिर है ।
भावार्थ -
यह घटना आज हो रहे मानवीय भेदभाव को समाप्त करने के लिए प्रेरणा देती है क्योंकि आज तो मनुष्य मनुष्य होते हुए भी आपस मे जाति, पंथ से एक दूसरे को भीन्न समझता है , परंतु महाभारत काल मे श्रेणी ही अलग थी ,पर फिर भी भेदभाव नही था , मानवता थी , सदाचार था , समभाव था , राक्षस श्रेणी में होते हुए भी उसकी अच्छाई को देखने की क्षमता थी |