दृढसंकल्पित बाल्यकाल महापुरुष बनने की आधारशिला
भारत की परंपरा में महापुरुषों के वंदन की एक महत्वपूर्ण जगह है क्योंकि भारत भूमि का इतिहास अनेको शक्तिशाली , दृढसंकल्पित, ऊर्जावान, निष्ठावान,नैतिक , बदलावकारी ,क्रांतिकारी महामानवो के द्वारा उठाये बदलाव के कदमो से लैस रहा है और आज भी हम अनेक पर्वो के माध्यम से उनका स्मरण करना अपना पुनीत कर्तव्य समझते है ।
ऐसे अनेक महापुरुषों का जीवन हमारे और आपके जीवन के समान ही साधारण और अनेक समस्यायों से घिरा रहा ,अनेक विपदा रूपी आंधियो ने उनकी आशाओ के वृक्ष को ढेर किया परंतु ऐसे बाल जीवन से ऊपर उठकर और आंधियो को चुनोतियाँ न मानकर अवसर माना और साधारण जीवन जीने वाले साधारण जीवन को असाधारण बनाकर महापुरुष कहलाने के अनेक कार्य कर हम सभी को प्रेरित करने का कार्य किया ।
आज युवाओ को अनेक मोह माया के जालो में फंसा देख बस ऐसे महापुरुषों को याद कर हम एक उपचार ढूंढ सकते है जैसे श्रीनिवास रामानुजन जिन्हें आज हम महान गणितज्ञ के रूप में जानते है परंतु प्रेरणा लेने हेतु हमे उनकी अपने संकल्प के प्रति दृढनिश्चय को देखना होगा,रामानुजन दसवीं में पढ़ते हुए बी ए के पाठ्यक्रम में निर्धारित त्रिकोणमति शास्त्र का अभ्यास पूर्ण तरीके से कर चुके थे ,साथ ही गणित में इतनी गहरी रुचि थी कि उन्होंने अपने परिवार की दीन हीन हालात जैसे कि कॉपी खरीदने हेतु पैसा न होने के कारण गणित के बड़े बड़े सवाल को कही छोटी सी स्लेट पे करने को मजबूर होने के बावजूद भी वह गणित के क्षेत्र में उत्तीर्ण हुए और और वह बताते थे कि मेरी आँखों के सम्मुख गणित की नवीन परिकल्पनाएं आने लगती है और में बिस्तर से उठकर उसे स्लेट पे उतार लेता हूं ,ऐसी तत्परता भरे बाल जीवन से अवस्य ही हमारी युवा शक्ति को प्रेरणा मिलती है ।
डॉ हेडगेवार,जिन्होंने विश्व के सबसे बड़े सामाजिक संगठन राष्ट्रीय स्वयं सेवक की रचना की ,किसी भी नवीन रचना का प्रत्यक्ष रूप प्राणी से मेहनत व आत्मविश्वास मांगता है ,इसी प्रकार हेडगेवार का बाल्यकाल कठिनायों से ग्रसित रहा जिसकी वजह से आने वाले भविष्य की हर चुनोती को अवसर बनाने की कला का निर्माण हुआ।11 वर्ष के हेडगेवार के मातापिता का देहांत नागपुर में फैले प्लेग के कारण हुआ इसी घटना ने सामाजिक सुरक्षा व बदलाव की तरफ उनके रुझान को मजबूती दी जिसके कारणवस वह अधिक क्रांतिकारी बालक बने जिन्होंने अंग्रेज़ो के राजा को हमारे शत्रुओ का राजा बताया और सभा आयोजित की जिसमे वन्देमातरम के गीत के साथ अंग्रेज़ो के बंगाल विभाजन को देश का बिभाजन मान कर एक क्रांति को जन्म दिया जो स्वाधीनता की लड़ाई का अभिन्न हिस्सा माना जाता है ।
राजा राममोहन रॉय की बचपन की एक घटना पुनः हमे सिखाती है कि दृढ़संकल्प का कोई विकप्प नही होता और इसी के चलते उन्होंने अपने बाल्यकाल में निर्धारित किया कि वह पूरी रामायण पढ़े बिना भोजन नही करेंगे क्योंकि वह शुरू से धार्मिक ग्रंथों को अपने जीवन मे बदलाव का कारक मानते थे और हम सभी जानते है उनकी बाल प्रवृती ने उनके आगामी जीवन पर प्रभाव डाला जिसके चलते उन्होंने धर्म की सही व्याख्या जनमानस तक रखी जिसका मतलब न सिर्फ देवी देवताओं का पूजन है बल्कि ऊंच नीच श्रेणि को जड़ से मिटाना भी है ,साथ ही राममोहन के बाल जीवन का प्रभाव और उनकी नेक सोच समाज मे बाल विवाह ,सती प्रथा आदि कुप्रथायो को अर्थहीन साबित करने में सफल हुई।
गौतम बुद्ध के सिद्धार्थ से बुद्ध बनने तक का सफर भी उनके बाल्यकाल के बहुत विनम्र,दयालु व करुणा से भरे गुणों में दिखता है ,जिसका उदहारण एक घटना है जिसमे घोड़ो के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए सिद्धार्थ घोड़ो को अधिक कष्ट में देखते हुए प्रतियोगिता में अपनी हार स्वीकार कर लेते है । अतः यह स्पष्ठ है कि जिस बुद्ध के शांति के मंत्र ने मानवता को सीख सिखाई उसकी उत्पत्ति बाल जीवन से ही हुई जिसका मतलब है संवेदनशीलता ही महान बनाती है ।
बाबा साहब अम्बेडकर का जीवन भी युवाओ को प्रेरणा देता है जो जात पात की जंजीरों से लड़कर,अनुशुचित जाती से होने के कारण हो रहे अत्याचारों को लड़ते हुए अपने जीवन मे आगे बढ़ने हेतु कठिन परिश्रम व सामाज। की संकुचित सोच से लड़ते हुए अपने आप को अपनी माँ के दिये पढ़ाई की महत्वता के मंत्र को स्वीकार करते हुए , सबसे ज्यादा डिग्री प्राप्त करने वाले महामानव बनते है ।अतः जिस की माँ की मृत्यु मात्र एक डॉक्टर की एक जाति से जुड़े होने के कारण घर पर इलाज ना करने के निर्णय से होती है ,वह बालक सभी समस्यायों से लड़ कुप्रथा को खत्म करने की मुहिम संविधान की रचना कर प्रत्येक मनुष्य को एकाधिकार देकर करता है ।
अतः बालजीवन से मिली सीख जीवन भर व्यक्ति निर्माण में काम आती है और महापुरुष का निर्माण ऐसे ही हटकर किए गए कार्यो से होता है ।आज भी देश में महापुरुष की साक्षात आवश्यकता है अतः युवा पीढ़ी को महापुरुष से सीख कर बदलाव का कारक बनने का प्रयास करना चाहिए ।