Monday, April 8, 2019

महाभारत से सीख

महाभारत  से सीख -

जब भीम और हिडम्बा का विवाह हो रहा था , तब भीम के भाई नकुल ने युधिस्ठर से पूछा -क्या मनुष्य और राक्षस का विवाह धर्म है ? क्योंकि राक्षस तो अधर्मी, कुकर्मी, व्यावचारी होते है परंतु युधिस्ठर ने कहा की  माता(कुंती) का आदेश धर्म है  और माता कुंती के आदेश अनुसार यह आवश्यक नही की राक्षस कुल में जन्म लेने वाला हर व्यक्ति अधर्मी हो व मानवता के विरुद्ध हो ।
माता कुंती का जवाब कुछ ऐसा था -
"में अपने पुत्र के सच्चे प्रेम को जाति, धर्म,में नही बांध सकती "
अतः अंत मे वहाँ से जाते वक्त माता कुंती ने हिडम्बा को कहा कि तुम आदर्श नारी और सरल ,सच्चे हृदय से धर्म का पालन करने वाली महिला है और में तुम्हे आशीर्वाद देती हूं कि आने वाले  समय में मनुष्य तुम्हारी पूजा करेंगे  ,जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण हिमाचल के मनाली में स्तिथ हिडिम्बा मंदिर है ।

भावार्थ -
यह घटना आज हो रहे मानवीय भेदभाव को समाप्त करने के लिए प्रेरणा देती है क्योंकि आज तो मनुष्य मनुष्य होते हुए भी आपस मे जाति, पंथ से एक दूसरे को भीन्न समझता है , परंतु महाभारत काल मे श्रेणी ही अलग थी ,पर फिर भी भेदभाव नही था , मानवता थी , सदाचार था , समभाव था , राक्षस श्रेणी में होते हुए भी उसकी अच्छाई को देखने की क्षमता थी |

Wednesday, April 3, 2019

My vote against dividers

Under strong leadership of sh.Narendra Modi,fruits of yojana,strong policies,decisive actions carried by him are reverberated not only in india but all over the world which defanged the opposition,a  ruling party or I call them consortium of dynasts who made political party a private company especially being carried to benefit the family members are today strongly rattled by the citizens of India who  believe in the importance of integrity,unity,strong and corruption  free india ,also who believes in the phrase ' "action speaks louder than words" have decided to cast their votes against all sort of forces running a campaign to mislead the nation, divide or destroy the nation by making statements in favour of hidden pro Pakistanis ,pro terrorist in india.

Coming to the congress manifesto,which is disheartening to me and to majority indians who believe that national security is as important as all other thing being talked about by politicians .the mention of article 370 to be untouched , renewing the AFSPA,removal of sedition laws seems to be words of terrorist being sponsored by pakistan in india , a conspiracy to remove a goverment who is focusing on making India a developed nation and if to fight strongly against separatist forces who see army less important than terrorist , who see tukde tukde gang more important than integrity and unity of india , who see omar abdullah saying india to have two prime ministers as more important than a united vision of  development  for india ,than its a high time to choose whom do you want to vote for .
Ambedkar said there is a high need to raise public conscience in democracy which will strengthen it and I believe conscience of my country is with nation and not with jihadi ,Pakistanis, bhai bhati jawad, parivarwad ,atankwad etc

Sunday, March 31, 2019

अबोध बालक से महापुरुष बनने तक का सफर

दृढसंकल्पित बाल्यकाल महापुरुष बनने की आधारशिला

भारत की परंपरा में महापुरुषों के वंदन की एक महत्वपूर्ण जगह है क्योंकि भारत भूमि का इतिहास अनेको शक्तिशाली , दृढसंकल्पित, ऊर्जावान, निष्ठावान,नैतिक , बदलावकारी ,क्रांतिकारी महामानवो के द्वारा उठाये बदलाव के कदमो से लैस रहा है और आज भी हम अनेक पर्वो के माध्यम से उनका स्मरण करना अपना पुनीत कर्तव्य समझते है ।
ऐसे अनेक महापुरुषों का जीवन हमारे और आपके जीवन के समान ही साधारण और अनेक समस्यायों से घिरा रहा ,अनेक विपदा रूपी आंधियो ने उनकी आशाओ के वृक्ष को ढेर किया परंतु ऐसे बाल जीवन से ऊपर उठकर और आंधियो को चुनोतियाँ न मानकर अवसर माना और साधारण जीवन जीने वाले साधारण जीवन को असाधारण बनाकर महापुरुष कहलाने के अनेक कार्य कर हम सभी को प्रेरित करने का कार्य किया ।
आज युवाओ को अनेक मोह माया के जालो में फंसा देख बस ऐसे महापुरुषों को याद कर हम एक उपचार ढूंढ सकते है जैसे श्रीनिवास रामानुजन जिन्हें आज हम महान गणितज्ञ के रूप में जानते है परंतु प्रेरणा लेने हेतु हमे उनकी अपने संकल्प के प्रति दृढनिश्चय को देखना होगा,रामानुजन दसवीं में पढ़ते हुए बी ए के पाठ्यक्रम में निर्धारित त्रिकोणमति शास्त्र का अभ्यास पूर्ण तरीके से कर चुके थे ,साथ ही गणित में इतनी गहरी रुचि थी कि उन्होंने अपने परिवार की दीन हीन हालात जैसे कि कॉपी खरीदने हेतु पैसा न होने के कारण गणित के बड़े बड़े सवाल को कही छोटी सी स्लेट पे करने को मजबूर होने के बावजूद भी वह गणित के क्षेत्र में उत्तीर्ण हुए और और वह बताते थे कि मेरी आँखों के सम्मुख गणित की नवीन परिकल्पनाएं आने लगती है और में बिस्तर से उठकर उसे स्लेट पे उतार लेता हूं ,ऐसी तत्परता भरे बाल जीवन से अवस्य ही हमारी युवा शक्ति को प्रेरणा मिलती है ।
डॉ हेडगेवार,जिन्होंने विश्व के सबसे बड़े सामाजिक संगठन राष्ट्रीय स्वयं सेवक की रचना की ,किसी भी नवीन रचना का प्रत्यक्ष रूप प्राणी से मेहनत व आत्मविश्वास मांगता है ,इसी प्रकार हेडगेवार का बाल्यकाल कठिनायों से ग्रसित रहा जिसकी वजह से आने वाले भविष्य की हर चुनोती को अवसर बनाने की कला का निर्माण हुआ।11 वर्ष के हेडगेवार के मातापिता का देहांत नागपुर में फैले प्लेग के कारण हुआ इसी घटना ने सामाजिक सुरक्षा व बदलाव की तरफ उनके रुझान को मजबूती दी जिसके कारणवस वह अधिक क्रांतिकारी बालक बने जिन्होंने अंग्रेज़ो के राजा को हमारे शत्रुओ का राजा बताया और सभा आयोजित की जिसमे वन्देमातरम के गीत के साथ अंग्रेज़ो के बंगाल विभाजन को देश का बिभाजन मान कर एक क्रांति को जन्म दिया जो स्वाधीनता की लड़ाई का अभिन्न हिस्सा माना जाता है ।
राजा राममोहन रॉय की बचपन की एक घटना पुनः हमे सिखाती है कि दृढ़संकल्प का कोई विकप्प नही होता और इसी के चलते उन्होंने अपने बाल्यकाल में निर्धारित किया कि वह पूरी रामायण पढ़े बिना भोजन नही करेंगे क्योंकि वह शुरू से धार्मिक ग्रंथों को अपने जीवन मे बदलाव का कारक मानते थे और हम सभी जानते है उनकी बाल प्रवृती ने उनके आगामी जीवन पर प्रभाव डाला जिसके चलते उन्होंने धर्म की सही व्याख्या जनमानस तक रखी जिसका मतलब न सिर्फ देवी देवताओं का पूजन है बल्कि ऊंच नीच श्रेणि को जड़ से मिटाना भी है ,साथ ही राममोहन के बाल जीवन का प्रभाव और उनकी नेक सोच समाज मे बाल विवाह ,सती प्रथा आदि कुप्रथायो को अर्थहीन साबित करने में सफल हुई।
गौतम बुद्ध के सिद्धार्थ से बुद्ध बनने तक का सफर भी उनके बाल्यकाल के बहुत विनम्र,दयालु व करुणा से भरे गुणों में दिखता है ,जिसका उदहारण एक घटना है जिसमे घोड़ो के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए सिद्धार्थ घोड़ो को अधिक कष्ट में देखते हुए प्रतियोगिता में अपनी हार स्वीकार कर लेते है । अतः यह स्पष्ठ है कि जिस बुद्ध के शांति के मंत्र ने मानवता को सीख सिखाई उसकी उत्पत्ति बाल जीवन से ही हुई जिसका मतलब है संवेदनशीलता ही महान बनाती है ।
बाबा साहब अम्बेडकर का जीवन भी युवाओ को प्रेरणा देता है जो जात पात की जंजीरों से लड़कर,अनुशुचित जाती से होने के कारण हो रहे अत्याचारों को लड़ते हुए अपने जीवन मे आगे बढ़ने हेतु कठिन परिश्रम व सामाज। की संकुचित सोच से लड़ते हुए अपने आप को अपनी माँ के दिये पढ़ाई की महत्वता के मंत्र को स्वीकार करते हुए , सबसे ज्यादा डिग्री प्राप्त करने वाले महामानव बनते है ।अतः जिस की माँ की मृत्यु मात्र एक डॉक्टर की एक जाति से जुड़े होने के कारण घर पर इलाज ना करने के निर्णय से होती है ,वह बालक सभी समस्यायों से लड़ कुप्रथा को खत्म करने की मुहिम संविधान की रचना कर प्रत्येक मनुष्य को एकाधिकार देकर करता है ।
अतः बालजीवन से मिली सीख जीवन भर व्यक्ति निर्माण में काम आती है और महापुरुष का निर्माण ऐसे ही हटकर किए गए कार्यो से होता है ।आज भी देश में महापुरुष की साक्षात आवश्यकता है अतः युवा पीढ़ी को महापुरुष से सीख कर बदलाव का कारक बनने का प्रयास करना चाहिए ।

वामपंथ का दोहरा चरित्र

#वामपंथ का दोहरा चरित्र#

सन 1949 में द्वितीय विश्वयुद्ध की समाप्ति  के पश्चात पूरे विश्व में पूँजीवादी व वामपंथी विचार ने अपने पंख पसारे व अन्य देशो को इनमें से किसी एक खेमे में जुड़ने को मजबूर किया जिसमें वित्त् सहयोग, आधुनिकरण,सुरक्षा आदि का झाँसा दिया गया परंतु ऐशियाई देशो  ने नेम(नान अलायन्मेंट मूव्मेंट) के तहत अपने को किसी भी एक विचार से अलग रख अपनी परिस्थितियों अनुसार हर विचार पे चल रहे देशो का आँकलन कर अपने अनुरूप नए विकास के मापदंडो को तैयार किया ।
रूस में गॉर्बचेव की नितियो ने विफलता का सामना किया व विश्व को वामपंथ पथ की विषमता को विश्व के सामने रखा,भारत ने अपनी एक अलग पहचान बनायी और एकाएक वामपंथी मार्ग पर चलने को भारतीय व्यवस्था के अनुरूप ना समझते हुए सबका साथ,विकास,उत्थान,विविधता में एकता का मार्ग अपनाया व हर वर्ग का विकास सुनिश्चित करने को अपनी सर्वप्रथम ज़िम्मेदारी माना।
स्वामी विवेकानंद ने 1900 में हुई कैलिफ़ोरनिया में हुई सभा में कहा किसी भी देश को समझने के लिए उसके विचारो को समझना पड़ेगा अर्थात मूल विचार से देश के विचार को पहचाना जाना चाहिए, इसीलिए पश्चिमी देशों में आयी आधुनिकरण की आँधी में श्रमिक वर्गों  पर होने वाले अत्याचारो के लिए एक रास्ता मार्क्सिज़म के रूप में हमें दिखा ,जिसमें समस्याओं के निवारण हेतु कोई एक निश्चित मार्ग नहीं मिलता और विभिन दोहरेचरित्र का परिणाम पूरे विश्व को दिखा है ,जिसके फलस्वरूप ,चीन व रूस को इस विचार में अनेक बदलाव ला कर अपनाने की प्रक्रिया में दिखता है ।
आनंद तेलतंबड़े अपनी किताब भारत और वामपंथ में लिखते है की किस तरह भारत में विभिन्न शब्दों का प्रयोग कर जेसे भारत पुरुष प्रधानता वाला देश है,भारत ब्रह्मणवादी सोच रखता है, भारत जातिवाद का समर्थक है व अन्याय को स्वीकारता है परंतु वह किताब में काम्रैड के एन जोगलेकर,बॉम्बे टेक्स्टायल संघ व कॉम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य का ज़िक्र करते हुए बताते है कि वह स्वयं ब्राह्मण सभा के सदस्य रहे व जाति व्यवस्था में भरोसा करने वाले रहे ।
साथ ही कामरेड मिराजकर का ज़िक्र करते है की किस तरह धरातल पर ब्रह्मणवादी सोच का विरोध करने वाले स्वयं मिराजकर आंदोलन कर रहे कार्यकर्ताओं को आश्वासन देते है की भोजन सिर्फ़ ब्राह्मण ही बनाएँगे , इस घटना से जातिवादी ज़ंजीरो में लिपटे वामपंथियों का सच दिखता है ।
ना सिर्फ़ ये बाबा साहेब अम्बेडकर जिन्होंने आजीवन दलित उत्थान में अपना योगदान दिया ,1928 में कहते है की दलित कर्मियों के साथ वामपंथियों द्वारा संचालित मिलो में अत्याचार होता है व अम्बेडकर एसी विचारधारा जो दलितों को आंदोलन के समय तक इंतज़ार करने को कहता है का पुरजोर विरोध करते है क्यूँकि वामपंथी विचारधारा पश्चिमी देशो के समान हर देश की एक  स्थिति समझ एक मात्र श्रमिक वर्गों के उत्थान की बात करता है,जबकि बाबा साहेब अम्बेडकर भारतीय समस्याओं को भारत के अनुरूप समझ वामपंथियों को विश्व के लिए समस्या बताते है क्यूँकि वह जातिवाद आदि समस्याओं को नज़रअन्दाज़ करने के साथ साथ समस्याओं  का समाधान ना देने पे भरोसा करते है जबकि बाबा साहब अम्बेडकर का मूल विचार समस्याओं के साथ साथ समाधान निकालना  हुआ करता था जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण हम सभी भारत के संविधान के रूप में देखते है,यह एक ऐसा शस्त्र था जिससे भारत में विराजमान अनेक समस्याओं का निवारण बाबा साहेब ने किया ।
हम आज देखते रहते है की वामपंथी हिंदू ग्रंथ गीता का अनादर करते है परंतु तेलतंबड़े लिखते है की कामरेड डाँगे लोकमान्य तिलक के विचारो को मानते थे व वह मार्क्सिज़म को वेद व भागवद गीता में देखते थे,इससे स्पष्ट है आज अपनी राजनीति  चलाने के लिए वामपंथी संगठन अन्य वर्गों के धार्मिक मान्यताओ व ग्रंथो पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करते है ।
बाबा साहेब अम्बेडकर वामपंथियों के आर्थिक,राजनीतिक व सामाजिक समस्याओं के उग्र समाधान पर मार्क्स व एंजलस के क्रांतिकारी क़दम को ग़लत ठहराते है व क़ानूनी प्रावधान देते है जिससे वह एक मार्ग प्रदर्शित करते है ,अतः समस्या से समाधान पर पुरज़ोर तरीक़े से ज़ोर दिया और वामपंथ को ख़ूनी विचारधारा बताया।
हम देखते है की वामपंथी राष्ट्रीय राजनीति व विश्वविद्यालयों में शांति के विचारो का उपदेश देते है परंतु दूसरी तरफ़ वामपंथ शासित राज्यों में जेसे की केरल में मानवाधिकार का हनन होता है जिसमें अन्य विचार से जुड़ने मात्र से हत्या की घटनाए सामने आती है ,जिसमें हाल ही में कॉम्युनिस्ट पार्टी द्वारा आनंदम की हत्या की घटना स्पष्ट करती है की आज़ाद देश में रहते हुए भी विपरीत विचार रखने वाले व्यक्ति के प्रति  क्रूर स्वाभाव समाप्त नहीं हुआ है ।
हाल ही में हिमाचल,जवाहरलाल नेहरू व पंजाब विश्वविद्यालय में वामपंथी विचार से जुड़े युवक युवतियों ने शांति की बात करने वाले स्वाभाव का दोहराचरित्र प्रदर्शित कर आज़ादी का गला दबाया।
अंततः वामपंथी जो अल्पसंख्यक के मसीहा बनते है उन्होंने बाबा साहेब अम्बेडकर के इस ओर किए प्रयासों को 1952  में हुई बेठक में साम्प्रदायिक बताकर दलित चिंतक,सच्चे राष्ट्रीय चिंतक पर हुए अत्याचारो का अनादर कर ,क्रूरता, अमानवीय होने का परिचय दिया व वो विचारधारा जिसे बाबा साहब अपनी संवेदनशील सोच के लिए सम्मान की निगाहो से देखते थे ,उनकी कथनी व करनी में  अंतर स्पष्ट रूप से विश्व के समक्ष शोषित पीड़ित वर्गों के विकास के विपरीत है |
बाबा साहब अम्बेडकर ने ताउम्र उत्पीडन सहा परंतु बदलाव की लौ को भुजने नही दिया ,परंतु वामपंथी खेमा जो अम्बेडर जी की प्रतिमा लिए  शोषितो को सिर्फ बरगलाने की राजनीति करता है,वह बाबा साहेब के राष्ट्र प्रेम में किए कार्यो को दरकिनार कर अपने हित मे कार्य करता है,बाबा साहेब ने भारत की अस्मिता को बनाये रखने के लिए बोद्ध धर्म अपनाया परंतु वामपंथी की करनी बिल्कुल अलग है जो 1962 में हुए भारत चीन युद्ध मे चीन के समर्थन के रूप में हमारे समक्ष है |
अतः भारत के मूल मंत्र वासुधैव कुटुम्बकम ,सर्वधर्म संभाव ,नर सेवा नारायण सेवा को आधार मान कर व काम,अर्थ को  धर्म( ज़िम्मेदारी) से बाँधकर निर्वाहन करने से गहरी अमानवीय खाईं समाप्त हो सकती है साथ ही वामपंथी विचार के दोहरे चरित्र का अंत अन्य नागरिकों के जीवनशैली को आदर देकर व समस्याओं के समाधान देने से होगा ।

-प्रिया शर्मा
-छात्रा दिल्ली विश्वविद्यालय

Sunday, January 20, 2019

Plastic planet is a reality haunting all of us today .we have been immensely creating plastic waste and throwing it freely like anything on streets,parks,oceans  and other water bodies which results in diverse forms of degradation of earth leading to threats to marine organisms in general and all of us in common .
In 2015, scientists said that “of the nearly 7 billion tons of plastic waste generated, only 9% was recycled, 12% incinerated, and 79% accumulated in landfills or the environment”.This raises serious concern about the future of planet to live peacefully as plastic waste calls for various problems which is engulfing is today in form of health hazards,land degradation,water pollution etc and will continue engulfing us if not tackled with properly.
In India, which accounts for almost 18% of the world population in 2.4% of the global land area, the accumulation of plastic waste is huge.This raises a concern if with population growth,grows the mind too ? Answer seems to be no,no of use today is even bothered about the challenges we will be encountered with if not stopped today.
Study revealed that 20 rivers (mostly from Asia) carry two-thirds of plastic waste to the ocean; the Ganga’s contribution to this is one of the highest, we believe in worshiping the rivers and expect happiness and well being in our life but what are we giving to our goddess  rivers, dangerous water,toxic elements,death of their residents I.e marine organisms etc by contributing in lowering down the water quality level to hazardous level ? Researchers exploring the Arctic have found very high levels of microplastics trapped in the ice,which is not something done in one year but a result of years of contribution by human beings, who relentlessly for selfish gains have led to this grim situation today and the picture is disheartening.
The economic impact of plastic pollution on marine ecosystems through fisheries and tourism losses and beach cleaning-up costs is estimated to be around $13 billion per year.
Drinking water samples analysed from 14 countries, including India, revealed that 83% have micro-plastics concentrations. According to a United Nations Environment Programme report, the overall annual natural capital cost of plastic use in the consumer goods sector is $75 billion.
Talking about the solutions we must lock up in our mind 4P protect planet from plastic pollution. 
Next step  is spreading awareness among masses which should start with young age People as they are change bearers with lots of fresh energy and enthusiasm.
Another step is to promote the startup’s ,companies and other ventures who have initiated selling items made of bamboo etc so as to make available various alternatives to masses at affordable price,so that accepting change becomes easy.
Lastly government must take steps to enforce plastic management rules 2016 in true sense along with waste management rules.

Each one accountable should be the slogan of each human being to stop the future consequences of the growing dangers out of plastic pollution and we must in this way adhere to protect the planet become a plastic planet by being true eco warriors .

Tuesday, January 15, 2019

Chargesheet on JNU February’s issue

“ India that is bharat shall be a union of state “says Article 1 of Indian constitution  means it is our duty to adhere to constitutional idea of ‘union of states’and if one raises the slogans “Bharat tere tukde honge inshaallah inshaallah “ is clearly a defamation of what our constitution believes in and is against article 1. 
Article 19(2) talking about certain restriction on  freedom of speech and expression says Nothing in sub-clause(a) of clause(1) shall affect the operation of any existing law, or prevent the State from making any law, in so far as such law imposes reasonable restrictions on the exercise of the right conferred by the said sub-clause in the interests of the sovereignty and integrity of India, the security of the State, friendly relations with foreign States, public order, decency or morality, or in relation to contempt of court, defamation or incitement to an offence.
In context of above mentioned articles in constitution chanting anti Indian slogans that is to ask for break down India into parts,to cherish people claimed as terrorist by court is simply disobedience to constitution and supreme body I.e judiciary .
If to allow this is being termed as flag bearer of free and liberal country,it’s better to not let  those people say so ,because India is a land of tolerance and  diversity who cannot on the name of freedom of speech and expression see a decay of very essence  of our constitution.

Whereas talking about sedition charges under 124A ,it is not to be seen as a slap on dissent as article 19(2) says freedom of speech and expression quotes for reasonable restriction when it comes as a challenge to sovereignty and integrity of India.

Chargesheet in the  JNU case is a welcoming step,keeping aside the timing of chargesheet because their are certain things which have to be seen from non political eyes and an issue like this shows growing strength of such element in society who hold sentiments of bifurcation  rather than amalgamation . 

To protect the constitution we really need to stand united ,we cannot simply ignore people doing away with the constitutional clauses on the name of freedom and liberty.

Monday, January 14, 2019

जिस प्रकार दलित एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं से वंचित जाती एवं वर्ग को आरक्षण इस बात पर सही माना जा सकता है कि इतिहास में हुए अत्याचारों को सही करने की ज़िम्मेदारी हम सभी वर्गों और मनुष्यों की बनती है ( history has to pay back ) ,ठीक इसी प्रकार से राम मंदिर का मुद्दा है जिसे ना दो धर्मों के बीच के समस्याओं के रूप मे देखा  जाना चाहिए ,इस बात को उस धर्म विशेष  के लोगों के साथ हुए अत्याचार  से जोड़ कर समझना  चाहिए जिनके आस्था से जुड़े मंदिर  की उपस्थिति  की पुष्टि दो बार 1997,2003 में आर्कीयलॉजिकल सर्वे  ऑफ़ इंडिया द्वारा खोज  में की जा चुकी है और ये माना जा चुका है की मुग़लों से कही हज़ार साल पहले से वहाँ राम मंदिर था जिसके अवशेष भी पाए गए है एवं तुलसीदोहा सतक में तुलसीदास ने आँखों देखी बात लिखी है की किस प्रकार मीर बाक़ी ने मंदिर की तोड़ फोड़ करायी किसी  के  भी  साथ  हुए अत्याचारों पर आवाज़ उठाने  के लिए हम सभी सहमत होते है, फिर किसी की  भी आस्था के साथ हो रहे खिलवाड़  को हम कम्यूनल पॉलिटिक्स  का नाम देकर नकारात्मक माहोल क्यू  बना देते है ?क्या इस मुद्दे पर भी ( history has to pay back ) की माँग हम सभी को मिलकर करने की ज़रूरत नहीं है
 उनकी बात अलग ही है  जो ASI की बातों  को भी ग़लत मानते है,उनकी मंशा क्या है वह स्वयं स्पष्ट है