जिस प्रकार दलित एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं से वंचित जाती एवं वर्ग को आरक्षण इस बात पर सही माना जा सकता है कि इतिहास में हुए अत्याचारों को सही करने की ज़िम्मेदारी हम सभी वर्गों और मनुष्यों की बनती है ( history has to pay back ) ,ठीक इसी प्रकार से राम मंदिर का मुद्दा है जिसे ना दो धर्मों के बीच के समस्याओं के रूप मे देखा जाना चाहिए ,इस बात को उस धर्म विशेष के लोगों के साथ हुए अत्याचार से जोड़ कर समझना चाहिए जिनके आस्था से जुड़े मंदिर की उपस्थिति की पुष्टि दो बार 1997,2003 में आर्कीयलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया द्वारा खोज में की जा चुकी है और ये माना जा चुका है की मुग़लों से कही हज़ार साल पहले से वहाँ राम मंदिर था जिसके अवशेष भी पाए गए है एवं तुलसीदोहा सतक में तुलसीदास ने आँखों देखी बात लिखी है की किस प्रकार मीर बाक़ी ने मंदिर की तोड़ फोड़ करायी ।किसी के भी साथ हुए अत्याचारों पर आवाज़ उठाने के लिए हम सभी सहमत होते है, फिर किसी की भी आस्था के साथ हो रहे खिलवाड़ को हम कम्यूनल पॉलिटिक्स का नाम देकर नकारात्मक माहोल क्यू बना देते है ?क्या इस मुद्दे पर भी ( history has to pay back ) की माँग हम सभी को मिलकर करने की ज़रूरत नहीं है ?
उनकी बात अलग ही है जो ASI की बातों को भी ग़लत मानते है,उनकी मंशा क्या है वह स्वयं स्पष्ट है ।
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